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السبت، 9 يناير، 2016

بيان المؤتمر الثالث لمنظمة إزرفان (حقوقنا، حرياتنا، دائما)


Erspress.com
انعقد بأنفا المؤتمر الوطني الثالث لمنظمة إزرفان تحت شعار ''حقوقنا، حرياتنا، دائما.'' أيام 21-22/12/2965، الموافق ل 02-03 يناير 2016، بحضور كافة أعضاء المكتب الوطني للمنظمة، وأعضاء مجلسها الوطني، ومؤتمرين عن مختلف الفروع، وواكب أشغال المؤتمر ملاحظين عن المنابر الاعلامية وجمعيات ومنظمات صديقة.
وإعمالا للقانون الأساسي للمنظمة تدارس المؤتمر مختلف القضايا التنظيمية، الإستراتيجية، الأمازيغية، على المستوى الوطني والإقليمي والدولي، في إطار اهتمامات وانشغالات منظمة إزرفان.
وفي هذا الصدد يسجل المؤتمر الوطني لمنظمة إزرفان بأسف شديد، استمرار التراجع وغياب الارادة السياسية على مستوى النهوض وإعادة الاعتبار وإنصاف الهوية واللغة الأمازيغية، وهي نفس الوضعية التي تميز قيم وحقوق الانسان بشكل عام بالمغرب، سواء تعلق الأمر بالحقوق المدنية والسياسية، أو على مستوى الحقوق الاقتصادية والاجتماعية والثقافية، خاصة في ظل الاحتقان المتعدد الأبعاد الذي خلقته وعززته الحكومة الإسلاموية الحالية.
كما أن المؤتمر الوطني لمنظمة إزرفان ومختلف أجهزة المنظمة تتابع بقلق بالغ التوتر غير الطبيعي المميز للعلاقات الدولية على خلفية المصالح الامبريالية الضيقة لبعض الدول في المجال العالمي، مع ما واكب هذه الوضعية من استفحال ظاهرة الإرهاب، وتفاقم أزمة اللاجئين، وتردي الأوضاع السياسية والاقتصادية والاجتماعية لدول الجنوب، وخاصة على مستوى القارة الافريقية.
انطلاقا مما سبق وبعد تدارس المؤتمر لمختلف هذه القضايا بما تستلزمه من اهتمام، فإننا نعلن للرأي العام الوطني والدولي ما يلي:
√ على المستوى الأمازيغي:
· إدانتنا الشديدة للمنع الذي تعرض له فرع منظمة إزرفان بأكادير من قبل السلطات المحلية بناء على الشطط في استعمال السلطة والأهواء الشخصية لممثلي وزارة الداخلية بأكادير، كما يدين المؤتمر كافة أشكال العنف والمتابعات البوليسية التي تطال مناضلي الحركة الثقافية الأمازيغية بمختلف المواقع 
الجامعية، وكذا كافة أشكال المنع والتضييق الذي تتعرض له مختلف المنظمات الامازيغية والحقوقية، والأحزاب السياسية الامازيغية.
· شجبنا غياب الارادة السياسية من طرف الدولة والإدارة المغربية إزاء حق إدماج الامازيغية في الاعلام وتعميمها بالتعليم وفي القضاء ومختلف مناحي الحياة العامة، كما يدين المؤتمر وبشدة التصريحات الاقصائية والعنصرية في حق الأمازيغ والهوية الأمازيغية، والصادرة من بعض المسؤولين الإداريين والحكوميين بالمغرب.
· اعتبارنا مؤسسة المعهد الملكي للثقافة الأمازيغية مؤسسة عاجزة سياسيا وفاشلة على مستوى النهوض باللغة والثقافة الامازيغية وإحقاق أبسط الحقوق الامازيغية وتفعيل المطالب الملحة للحركة الأمازيغة، كما أن ذات المؤسسة تفتقر للجرأة والقرار السياسي والإداري، بهدف تسويف مختلف مكاسب ومطالب الامازيغ بالمغرب.
· مساندتنا الدائمة والمطلقة لحركة تاوادا ن إيمازيغن ، ومختلف المحاولات الجادة لتنسيق وتوحيد نضالات الحركة الأمازيغية بالمغرب ، كما يدعم المؤتمر نضالات الحركة الامازيغية بعموم أقطار بلاد تمازغا.
· تشبثنا ببراءة المعتقلين السياسيين للحركة الامازيغية حميد أعضوش ومصطفى أسايا، وتأكيد استمرار مطالبتنا باطلاق سراحهم العاجل والفوري..
√ على المستوى الوطني:
· رفضنا المطلق للإجراءات التقشفية للحكومة الاسلاموية، التي تستهدف بالأساس الفئات المعوزة والطبقة المتوسطة بالمغرب، مع تغاضيها عن لوبيات الفساد وحماية مصالح الطبقات الغنية، في إطار تشجيعها للريع السياسي والاقتصادي والاجتماعي، مستهدفة وبشكل مباشر الأمن الاجتماعي لعموم المغاربة، من خلال خطوات غير محسوبة العواقب كرفع الدعم عن المواد الأساسية، وإصلاح أنظمة التقاعد، تجميد الأجور... وغيرها من الاجراءات التي فرضتها الاملاءات الخارجية للمؤسسات المالية الدولية الراعية لمصالح الشركات المتعددة الجنسية.
· يعلن المؤتمر تضامنه المطلق واللامشروط مع المطالب المشروعة للأساتذة المتدربين، والأطباء والممرضين، والمعطلين حاملي الشواهد العليا، وكافة مكونات الشغيلة المغربية في نضالاتها ضد القوانين والقرارات والسياسات التسويفية التراجعية للحكومة المغربية.
· استنكارنا الشديد لترامي الدولة على أراضي المواطنين، تحت ذرائع ما يسمى تحديد الملك الغابوي وأراضي الجموع والملك البحري والأملاك المخزنية، وتفويتها للوبيات العقارية والاقتصادية، في إطار مسلسل تفقير المواطنين وإقصائهم من حقهم المتوارث في الأرض ومختلف الثروات الطبيعية الوطنية.
· إدانتنا لاستمرار تجاهل ما تعرضت له المناطق الجنوبية من أضرار بسبب التساقطات المطرية، وعدم تعويض ضحاياها.
· اعتبارنا التصريحات الأخيرة المثيرة للجدل والصادرة عن بعض الوزراء والبرلمانيين، استهزاء بالشعب المغربي، وتعبير عن مدى الانحطاط السياسي الذي بلغته بعض المؤسسات المتحكمة في مصائر الشعب المغربي.
√ على المستوى الدولي:
· يدين المؤتمر العمليات الارهابية التي ميزت العالم خلال الآونة الأخيرة، ويسجل تضامنه مع الشعوب والدول المستهدفة وعائلات الضحايا، ويثير المؤتمر انتباه المنتظم الدولي إلى اليقضة لمواجهة الفكر الأصولي والظلامي، وفضح الدول الراعية للإرهاب ومقاطعتها سياسيا واقتصاديا وديبلوماسيا.
· اعتبارنا أزمة اللاجئين ازمة أنتجتها الأنظمة العروبية الديكتاتورية البعثية، تؤدي فاتورتها الدول الديمقراطية الغربية، في ظل موقف المتفرج الذي اتخذته معظم دول البترودولار التي رفضت أن تفتح حدودها للاجئين.
· تنبيهنا هيئة الامم المتحدة وأمينها العام ومختلف الهيئات الحقوقية الدولية إلى جرائم الحرب/ حرب الابادة العرقية التي تنهجها بعض الدول في حق شعب الكرد.
· تثميننا مقتضيات اتفاق قمة المناخ بباريس، وندعوا كافة الدول والحكومات إلى تحمل مسؤولياتها التاريخية أمام الأجيال القادمة في تطبيق وتنفيذ بنود الاتفاق وحماية الأرض من بطش الانسان ومصالح اللوبيات والشركات الاقتصادية العالمية.
عن المؤتمر الثالث لمنظمة إزرفان 
أنفا 03/01/2016
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ⴼⵉⵡ ⵏ ⵓⴱⵔⴰⴳⵔⴰⵡ ⵡⵉⵙⵙ ⴽⵕⴰⴹ ⵏ ⵜⵎⴰⴳⵔⴰⵡⵜ ⵉⵣⵔⴼⴰⵏ
ⵉⵜⵜⵡⴰⵢⵙⴽⴰⵔ ⴳ ⵡⴰⵏⴼⴰ ⵓⴱⵔⴰⴳⵔⴰⵡ ⴰⵏⴰⵎⵓⵔ ⵡⵉⵙⵙ ⴽⵕⴰⴹ ⵏ ⵜⵎⴰⴳⵔⴰⵡⵜ ⵉⵣⵔⴼⴰⵏ ⴷⴷⴰⵡ ⵜⵎⴰⵜⴰⵔⵜ : “ⵉⵣⵔⴼⴰⵏ ⵏⵏⵖ, ⵜⵉⵍⴻⵍⵍⵉ ⵏⵏⵖ, ⴰⵍⵉⴹ”. ⵓⵙⵙⴰⵏ ⵏ 21 ⴷ 22/ 12/2965 ⵉⵎⵙⴰⵙⴰⵏ ⴷ 02 ⴷ 03 ⵉⵏⵏⴰⵢⵔ 2015, ⵍⵍⵉⴳ ⴰⴽⴽⵯ ⵎⵎⴳⵏⵜⵏ ⵉⵎⵍⵜⴰⵖⵏ ⵏ ⵓⵎⴰⵔⵉⵙ ⴰⵏⴰⵔⵓⵔ ⵏ ⵜⵎⴰⴳⵔⴰⵡⵜ, ⴷ ⵉⵎⵍⵜⴰⵖⵏ ⵓⵙⵇⵇⵉⵎ ⴰⵏⴰⵎⵓⵔ, ⴷ ⵉⵎⵙⴰⴳⵔⴰⵡⵏ ⵙⴳ ⵡⴰⵢⵢⴰⵡⵏ ⵏ ⵜⵎⴰⴳⵔⴰⵡⵜ, ⵜⵉⵡⵓⵔⵉⵡⵉⵏ ⵏ ⵓⴱⵔⴰⴳⵔⴰⵡ ⴹⴼⵕⵏ ⵜⵏⵜ ⵉⵏⴰⵖⵎⴰⵙⵏ ⴷ ⵜⵎⵙⵎⵓⵏⵉⵏ ⴷ ⵜⵎⴰⴳⵔⴰⵡⵉⵏ ⴳⴰⵏⵉⵏ ⵜⵉⵎⴷⴷⵓⴽⴽⵯⴰⵍ.
ⵎⴽ ⵍⵍⵉ ⵏⵙⴽⵔ ⵙ ⵡⴰⵎⵎⵓ ⴰⴷⵙⵍⴰⵏ ⵏ ⵜⵎⴰⴳⵔⴰⵡⵜ ⵉⵍⵎⵎⴷ ⵓⴱⵔⴰⴳⵔⴰⵡ ⵎⵏⵏⴰⵡⵜ ⵜⵎⵏⵜⵉⵍⵉⵏ ⵏ ⵓⵙⵏⵎⴰⵍⴰ, ⵜⵉⵙⵜⵔⴰⵜⵉⵊⵉⵢⵉⵏ, ⵜⵉⵎⴰⵣⵉⵖⵉⵏ, ⴳ ⵓⵙⵡⵉⵔ ⴰⵏⴰⵎⵓⵔ ⴷ ⵓⵏⵎⵏⴰⴹ ⴷ ⵓⴳⵔⴰⵖⵍⴰⵏ, ⵖ ⴰⵢⵍⵍⵉ ⵉⵙⵏⵏⵣⴳⵎⵏ ⵜⴰⵎⴰⴳⵔⴰⵡⵜ ⵏ ⵉⵣⵔⴼⴰⵏ.
ⵙⴳ ⴰⵢⴰ ⴷ ⴰⵔ ⵉⵜⵜⵣⵎⵎⴻⵎ ⵓⴱⵔⴰⴳⵔⴰⵡ ⴰⵏⴰⵎⵓⵔ  ⵏ ⵜⵎⴰⴳⵔⴰⵡⵜ ⵉⵣⵔⴼⴰⵏ ⵙ ⵜⴳⵓⴹⵉ ⵉⴳⴳⵓⵜⵏ, ⴰⴹⴼⵕ ⵏ ⵓⴷⵡⴰⵍ ⴷ ⵓⵏⵖⵓⴱⵓ ⵏ ⵓⵥⵉⵥⵥⴹ ⴰⵙⵔⵜⴰⵏ  ⵏ ⵓⵣⵓⴳⴳⵣ  ⵜⴰⵖⴰⵔⴰ ⵜ ⵜⵓⵏⵚⵉⴱⵜ ⴷ ⵓⵙⵣⵣⵔⴼ ⵏ ⵜⵎⴰⴳⵉⵜ ⴷ ⵜⵓⵜⵍⴰⵢⵜ ⵜⴰⵎⴰⵣⵉⵖⵜ, ⵎⴽ ⴰⵏⵏ ⵏⵉⵜ ⴰⴷ ⴳⴰⵏ ⵉⵜⴰⴳⵏ ⴷ ⵉⵣⵔⴼⴰⵏ ⵏ ⵓⴼⴳⴰⵏ ⵙ ⵓⵎⴰⵜⴰ ⴳ ⵍⵎⵖⵔⵉⴱ, ⵣⵓⵏ ⴷ ⴳⴰⵏ ⵉⵣⵔⴼⴰⵏ ⵉⵏⵅⴼⴰⵡⵏ ⵏⵖ ⴷ ⵉⵣⴼⴰⵏ ⵉⵙⵔⵜⴰⵏⵏ,ⵏⵖ ⴷ ⵉⵣⵔⴼⴰⵏ ⵉⴷⴰⵎⵙⴰⵏⵏ ⴷ ⵉⴷⵍⵙⴰⵏⵏ, ⵙⵍⴰⵡⴰⵏⵜ ⴰⴽⴽⵯ ⵖ ⴷⴷⴰⵡ ⵓⵎⴰⵍⵓ ⵏ ⴳⴰⵔ ⴰⵙⵙⵏⴱⴹ ⵏ ⵜⵏⴱⴰⴹⵜ ⵜⴰⵎⵓⵙⵍⵎⵜ ⵍⵍⵉ ⵉⵍⵍⴰⵏ ⵖⵉⵍ ⴰⴷ.
ⵎⴽ ⵍⵍⵉ ⵉⴹⴼⵕ ⵓⴱⵔⴰⴳⵔⴰⵡ ⴰⵏⴰⵎⵓⵔ ⵏ ⵜⵎⴰⴳⵔⴰⵡⵜ ⵉⵣⵔⴼⴰⵏ ⵙ ⵜⴰⵢⵎⵓⵏⵉⵏ ⵏⵏⵙ ⵜⵉⵎⵏⵏⴰⵡⵉⵏ ⵜⴹⴼⵕ ⵙ ⵜⵛⴰⴳⴰ ⵉⴳⴳⵓⵜⵏ  ⴰⵎⵜⵡⵉⵢ ⵍⵍⵉ ⵍⵙⴰⵏⵜ ⵜⵣⴷⴰⵢⵉⵏ ⵜⵉⴳⵔⴰⵖⵍⴰⵏⵉⵏ ⵙ ⵢⵉⵙⵎ ⵏ ⵜⵏⵢⴰⴼⵉⵏ ⵜⵉⵎⴱⴱⵉⵢⴰⵍⵉⵢⵉⵏ  ⴽⵔⵔⵓⵥⵏⵉⵏ  ⵏ ⴽⵔⴰ ⵖ ⵡⴰⵡⴰⵏⴽⵏ ⴳ ⵓⴷⵖⴰⵔ ⴰⵎⴰⴹⵍⴰⵏ, ⵎⴽ ⵍⵍⵉ ⴷ ⵉⵎⵓⵏ ⴷ ⵡⴰⴷⴷⴰⴷ ⴰⴷ  ⴰⴱⵔⵙⵙⵉⵡⴷ ⵍⵍⵉ ⵢⵓⵜⵏ ⵎⵏⵏⴰⵡ ⵉⴷⵖⴰⵔⵏ ⴳ ⵓⵎⴰⴹⴰⵍ, ⴷ ⵜⴰⵙⵙⴰⵙⵜ ⵏ ⵉⵎⵣⵡⴰⴳⵏ, ⴷ ⵜⴰⵙⵙⴰⵙⵏⵜ ⵏ ⵡⴰⴷⴷⴰⴷⵏ ⵉⵙⵔⵜⴰⵏⵏ ⴷ ⵉⴷⴰⵎⵙⴰⵏⵏ ⴷ ⵉⵏⴰⵎⵓⵏⵏ ⵏ ⵡⴰⵡⴰⵏⴽⵏ ⵏ ⵢⵉⴼⴼⵓⵙ, ⵙⵍⴰⵡⴰⵏⵏ ⴰⴽⴽⵯ ⴳ ⵉⵔⵉⵇⵢⴰ.
ⵙⴳ ⵎⴰⴷ ⵉⵣⵡⴰⵔⵏ ⴷ ⴷⴼⴼⵉⵔ ⵎⴰⴷ ⵉⵍⵎⵎⴷ ⵓⴱⵔⴰⴳⵔⴰⵡ  ⵎⵏⵏⴰⵡⵜ ⵜⵎⵏⵜⵉⵍⵉⵏ  ⴰⵔ ⵏⵜⵜⵉⵏⵉ ⵉ ⵓⴱⴰⵔⴰⵣ ⴰⵙⵔⵜⴰⵏ ⴰⵏⴰⵎⵓⵔ ⴷ ⵓⴳⵔⴰⵖⵍⴰⵏ, ⴰⵢⴰ ⴷ :
ⴳ ⵓⵙⵡⵉⵔ ⵏ ⵜⵎⵎⵓⵣⵖⴰ:
ⵜⴰⵖⵓⵢⵢⵉⵜ ⵏⵏⵖ ⴼ ⵉⵎⴰⵙⵙⴰⵢⵏ ⵉⵏⵎⵏⵀⴰⵍⵏ ⵏ ⵜⵎⴰⵡⴰⵙⵜ ⵜⴰⴳⵯⵏⵙⴰⵏⵜ ⵏ  ⵓⴳⴰⴷⵉⵔ ⵍⵍⵉ ⵉⴱⴷⴷⵏ ⴷⴰⵜ ⵏ ⵓⵙⵙⵖⵏⵓ ⵏ ⵡⴰⵢⵢⴰⵡ ⵏ ⵜⵎⴰⴳⵔⴰⵡⵜ ⵉⵣⵔⴼⴰⵏ, ⵎⴽ ⵍⵍⵉ ⵉⵙⵖⵓⵢⵢⵓ ⵓⴱⵔⴰⴳⵔⴰⵡ ⴰⵎⵔⵎⴷ  ⴷ  ⵓⴹⴼⵕ ⴰⴱⵓⵍⵉⵙⵉⵢ  ⵉ ⵉⵎⵖⵏⴰⵙⵏ ⵏ ⵓⵎⵓⵙⵙⵓ ⴰⴷⵍⵙⴰⵏ ⴰⵎⴰⵣⵉⵖ  ⴳ  ⵜⵙⴷⴰⵡⵉⵢⵉⵏ  ⵜⵉⵎⵏⵏⴰⵡⵉⵏ ⵏ ⵓⵎⵕⵕⵓⴽ, ⴷ ⵓⵙⵙⴳⵯⴷⵍ ⴷ ⵓⵙⵏⵏⵓⴽⵎⵓ ⴳ ⵓⵣⵔⴼ ⵏ ⵜⵎⴰⴳⵔⴰⵡⵉⵏ ⵜⵉⵎⵏⵏⴰⵡⵉⵏ ⵜⵉⵎⴰⵣⵉⵖⵉⵏ ⴷ ⵜⵣⵔⴼⴰⵏⵉⵏ, ⴷ ⵉⴽⴰⴱⴰⵔⵏ ⵉⵙⵔⵜⴰⵏⵏ ⵉⵎⴰⵣⵉⵖⵏ.
ⵜⴰⵖⵉⵢⵢⵉⵜ ⵏⵏⵖ  ⴼ ⵓⵏⵖⵓⴱⵓ ⵏ ⵜⵉⵔⵉⵜ ⵜⴰⵙⵔⵜⴰⵏⵜ  ⴷⴰⵔ ⵡⴰⵡⴰⵏ ⴷ ⵜⵎⵏⵀⴰⵍⵜ ⵜⴰⵎⵖⵔⵉⴱⵉⵜ ⴼ ⵓⵙⵙⴽⵛⵎ ⵏ ⵜⵎⴰⵣⵉⵖⵜ ⵙ ⵓⵙⵏⵖⵎⵙ ⴷ ⵓⵙⵙⵍⵎⴷ ⴷ ⵜⵏⵣⵣⴰⵔⴼⵓⵜ ⴷ ⵉⴳⵔⴰⵏ ⵉⵎⵏⵏⴰⵡⵏ ⵏ ⵜⵓⴷⵔⵜ ⵜⴰⴽⵓⵢⴰⵙⵜ, ⴷ ⵎⴽ ⵍⵍⵉ ⵏⵙⵖⵓⵢⵢⵓ ⴼ ⵓⵙⵉⵜⵜⵓ ⴰⵥⵓⵕⴰⵏ ⵉ ⵉⵎⴰⵣⵉⵖⵏ ⴷ ⵜⵎⴰⴳⵉⵜ ⵜⴰⵎⴰⵣⵉⵖⵜ ⵍⵍⵉ ⴷ ⵉⴽⴽⴰⵏ ⵙⴳ ⴷⴰⵔ  ⴽⵔⴰ ⵖ ⵉⵎⵙⴳⴳⴰⵔⵏ  ⵉⵏⵏⵎⵏⵀⴰⵍⵏ ⴷ ⵉⵏⴻⵏⴱⴰⴹⵏ ⴳ ⵓⵎⵕⵕⵓⴽ.
ⴰⵔ ⵏⵜⵜⵉⵏⵉ ⵎⴰⵙ ⴷ ⵜⵉⵎⵔⵙⵍⵜ ⵏ ⵓⵙⵉⵏⴰⴳ ⴰⴳⵍⴷⴰⵏ ⵏ ⵜⵓⵙⵙⵏⴰ ⵜⴰⵎⴰⵣⵉⵖⵜ  ⵜⴳⴰ ⵜⴰⵎⴰⵙⵙⴰⵢⵜ ⴷⴰⵜ  ⵏ ⵜⵕⵥⵉ ⵍⵍⵉ ⵉⵍⴽⵎⵏ ⵜⴰⵎⴰⵣⵉⵖⵜ  ⴳ ⵓⵙⵡⵉⵔ ⴰⵙⵔⵜⴰⵏ ⴷ ⵓⵔ ⵜⵥⴷⴰⵕ ⴰⴷ ⴰⵙ ⵜⵃⵉⵢⵢⵍ ⵎⵇⵇⴰⵔ ⴷ ⵉⵣⵔⴼⴰⵏ ⴷⵔⵓⵙⵏⵉⵏ ⴷ ⵓⵣⵓⴳⴳⵣ  ⵏ ⵉⵙⵙⵓⵜⵓⵔⵏ ⵏ ⵓⵎⵓⵙⵙⵓ ⴰⵎⴰⵣⵉⵖ, ⴷ ⵎⴽ ⴷⴰ ⵓⵔ ⵜⵟⵟⴼ ⵜⵎⵔⵙⵍⵜ ⴰⴷ ⵜⵉⵣⵎⵎⴰⵔ ⴼ ⴰⴷ  ⵜⵣⵣⵓⴳⵣ ⴰⵙⵙⵏⵚⴱ ⵏ ⵜⵎⴰⵣⵉⵖⵜ.
ⵜⵉⵡⵉⵣⵉ ⵏⵏⵖ ⵉ ⵓⵎⵓⵙⵙⵓ  ⵜⴰⵡⴰⴷⴰ ⵏ ⵉⵎⴰⵣⵉⵖⵏ ⴷ ⵜⵣⵎⵎⴰⵔ ⴷⵓⵙⵏⵉⵏ  ⵏ ⵜⵣⴷⴰⵢⵜ ⴷ  ⵓⵎⵓⵍⵍⵉ ⵏ ⵜⵖⵏⵙⴰ ⵏ ⵉⵎⴰⵣⵉⵖⵏ ⴳ ⵓⵎⵕⵕⵓⴽ ⴷ ⵜⵎⵎⴰⵣⵖⴰ, ⴷ ⴰⵔ ⵉⵜⵜⴰⵡⵙ ⵓⴱⵔⴰⴳⵔⴰⵡ ⵜⴰⵖⵏⵙⴰ ⵏ ⵉⵎⴰⵣⵉⵖⵜ ⴳ ⵉⵏⵏⴰ ⴳ ⵍⵍⴰⵏ ⴳ ⵜⵎⵎⴰⵣⵖⴰ
ⵉⵎⵉⵥ ⵏⵏⵖ ⴳ ⵜⵣⴷⵉⴳⵜ ⵏ ⵉⵏⴽⵔⴰⴼ ⵉⵙⵔⵜⴰⵏⵏ ⵏ ⵓⵎⵓⵙⵙⵓ ⴰⴷⵍⵙⴰⵏ ⴰⵎⴰⵣⵉⵖ ⵃⴰⵎⵉⴷ ⵓⵄⴹⵉⵛ ⴷ ⵎⵙⵟⴰⴼⴰ ⵓⵙⴰⵢⴰ, ⴷ ⵓⴹⴼⵕ ⵏⵏⵖ  ⵓⵙⵙⵓⵜⵔ ⵏ ⵜⵍⴻⵍⵍⵉ ⵏⵏⵙ  ⵙ ⵓⵍⴳⴳⵓⴷ.
ⴳ ⵓⵙⵡⵉⵔ ⴰⵏⴰⵎⵓⵔ:
ⴰⵔ ⵏⵜⵜⵉⵏⵉ ⵎⴰⵙ  ⵏⵓⴳⵉ  ⵜⵉⵖⴰⵔⴰⵙⵉⵏ ⵜⵉⵇⵎⵛⴰⵛⵉⵏ ⵏ ⵜⵏⴱⴰⴹⵜ ⵜⴰⵎ  ⵜⴰⵎⵓⵙⵍⵎⵜ,  ⵍⵍⵉ ⵉⴽⴽⴰⵜⵏ ⵖ ⵉⵎⵥⵍⴰⴹ ⵏ ⵓⵎⵕⵕⵓⴽ, ⵎⴽ ⵍⵍⵉ ⵜⴼⴼⴱ ⵉⵍⵓⴱⵉⵢⵏ ⵉⴱⴰⵖⵓⵔⵏ, ⴰⵢⴰ ⵏⵏ ⴰⵙ ⴰⵔ ⵜⵜⵙⵉⵎⵖⵓⵔ ⵙ “ⵔⵔⵉⵄ”  ⴰⵙⵔⵜⴰⵏ ⴷ ⵓⴷⴰⵎⵙⴰⵏ ⴷ ⵓⵏⴰⵎⵓⵏ, ⵍⵍⵉ ⵉⴽⴽⴰⵜⵏ  ⵙ ⵜⵖⴰⵔⴰⵙⵜ ⵜⵓⵙⵔⵉⴷⵜ  ⵜⴰⴷⵓⴼⵉ   ⵜⴰⵏⴰⵎⵓⵏⵜ ⵏ ⵉⵎⵕⵕⵓⴽⵉⵢⵏ, ⵙⵍⴰⵡⴰⵏⵏ ⴰⴽⴽⵯ ⵍⵍⵉⵖ ⵉⵜⵜⵢⴰⵙⴰⵢ ⵓⵍⵣⴰⵣ  ⴼ ⵜⴰⵏⴳⵉⵡⵉ ⵜⵉⴷⵙⵍⴰⵏⵉⵏ, ⴰⵙⵖⵓⴷⵓ ⵏ ⵍⴰⵏⵜⵔⵉⵜ, ⴰⵙⴱⴷⴷ ⵏ ⵜⵖⵔⴰⴹ...  ⴷ ⵜⵓⴳⵜⵜ ⵏ ⵜⵖⴰⵡⵙⵉⵡⵉⵏ ⵍⵍⵉ ⵣⵣⵓⴳⵣⵏ ⵉⵙⵙⴼⵜⵉⵜⵏ ⵉⴱⵔⵔⴰⵏⵉⵢⵏ ⵏ ⵜⵎⵔⵙⵉⵍⵉⵏ ⵜⵉⴳⵔⴰⵖⵍⴰⵏⵉⵏ ⵏ ⵜⴷⵔⵉⵎⵜ ⵍⵍⵉ ⵜⵜ ⵢⵉⵡⵉ ⴳ ⵜⵏⵢⴰⴼⵉⵏ ⵏ ⵜⵎⴰⵙⵓⵔⵉⵏ ⵜⵉⵎⵇⵇⵔⴰⵏⵉⵏ.
ⴰⵙⵙⵉⵍⵖ ⵏ ⵓⴱⵔⴰⴳⵔⴰⵡ ⵜⵉⵡⵉⵙⵉ ⵏⵏⵙ ⵜⴰⵔ ⵜⴰⴼⴰⴷⴰ  ⵉ ⵓⵙⵙⵓⵜⵓⵔⵏ ⵏ ⵉⵙⵍⵎⴰⴷⵏ ⵉⵎⴰⵏⵓⵏⵏ ⴷ ⵉⵎⵙⴳⵏⴰⴼⵏ  ⴷ ⵉⴷ ⴱⵓ ⵉⵙⵍⴽⵉⵏⵏ ⴰⵜⵜⵓⵢⵏⵉⵏ  ⴷ ⵉⵏⴰⵡⵡⵓⵔⵏ ⴳ ⵜⵖⵏⵙⴰ ⵏⵏⵙⵏ  ⴼ  ⵉⵙⵏⵉⵇⵇⵙⵏ ⵉⵙⵔⵜⴰⵏⵏ  ⵏ ⵓⵙⵓⴳⴳⵯⵎ ⵏ ⵜⵏⴱⴰⴹⵜ ⵜⴰⵎⵕⵕⵓⴽⵉⵢ.
ⵜⴰⵖⵓⵢⵢⵉⵜ ⵏⵏⵖ ⴼ ⵜⵡⴽⴽⴰⵙⵜ ⵏ ⵡⴰⵡⴰⵏⴽ ⵉⴽⴰⵍⵉⵡⵏ ⵏ ⵉⵎⵏⵏⵓⵎⵔⴰ ⴷⴷⴰⵡ ⵓⵎⴰⵍⵓ ⵏ ⵓⵙⵓⵡⵡⵜⵓ ⵏ ⵡⴰⵢⴷⴰ ⵏ ⵜⴰⴳⴰⵏⵜ ⴷ ⵡⴰⵢⴷⴰ ⵏ ⵢⵉⵍⵍ ⴷ ⵡⴰⵢⴷⴰ ⵏ ⵓⴷⴰⴱⵓ, ⴷ ⵎⴽ ⴷⴰ ⵜⵏⵜ ⵣⵔⴰⵢⵏ ⵉ ⵉⴱⴰⵖⵓⵔⵏ ⴷ ⵉⵍⵓⴱⵉⵢⵏ ⵉⴷⴰⵎⵙⴰⵏⵏ ⴰⵢⵍⵍⵉ ⵙ ⵏⵏ ⵜⵜⴰⵡⵉⵏ ⵎⵉⴷⴷⵏ ⵙ ⵜⵎⴷⴰ ⵏ ⵥⵥⵍⴹ  ⴷ ⵓⵙⵉⵜⵜⵉ ⵏⵏⵙⵏ  ⵙⴳ ⵓⵣⵔⴼ ⵏⵏⵙⵏ ⴷⴰ ⴽⴽⵓⵙⴰⵏ ⴳ ⵡⴰⴽⴰⵍ ⴷ ⵉⵙⵓⴳⴰⵎ ⵏ ⵜⵎⵓⵙⵜ ⵉⵎⵏⵏⴰⵡⵏ.
ⵜⴰⵖⵓⵢⵢⵉⵜ ⵏⵏⵖ ⴼ ⵉⵡⵏⵏⴰⵏ ⵏ ⵉⵏⵖⵍⴰⴼⵏ ⴷ ⵉⵎⴰⵡⴰⵙⵏ ⴷ ⵉⴱⴰⵔⵍⴰⵎⴰⵏⵉⵢⵏ, ⵍⵍⵉ ⵙⵙⵍⴽⴰⵏⵉⵏ ⵙ ⵓⵎⴰⴷⴰⵏ ⴰⵎⴰⵣⵉⵖ ⴷ ⵓⵎⵕⵕⵓⴽⵉⵢ. ⴷ ⴰⵔ ⵏⵜⵜⵣⵎⵎⴻⵎ  ⴰⵙⵡⵉⵔ ⴰⵙⵔⵜⴰⵏ ⵉⴹⵕⵏ ⵏ ⴽⵔⴰ ⴳ ⵜⵎⵔⵙⴰⵍⵉⵏ ⵍⵍⵉ ⵏⴱⴹⵏⵉⵏ ⴳ ⵓⵙⴷⵡⵍ ⵏ ⵓⵖⵔⴼ ⴰⵎⵕⵕⵓⴽⵉⵢ.
ⴳ ⵓⵙⵡⵉⵔ ⴰⵎⴰⴹⵍⴰⵏ
ⵜⴰⵖⵓⵢⵢⵉⵜ ⵏⵏⵖ ⴼ ⵓⴱⵔⵙⵙⵉⵡⴷ ⵍⵍⵉ ⵢⵓⵜⵏ  ⵎⵏⵏⴰⵡⵜ ⵜⵎⵓⵔⴰ ⵏ ⵓⵎⴰⴹⴰⵍ  ⴳ ⵜⴳⵉⵔⴰ ⴰⴷ, ⴷ ⴰⵔ ⵏⵜⵜⴰⵡⵙ ⵉ ⵉⵎⴰⴷⴰⵏⵏ ⴷ ⵡⴰⵡⴰⵏⴽⵏ ⵍⵍⵉ ⵜⵜⵡⴰⵜⵏⵉⵏ ⴷ ⵜⴰⵡⵊⵉⵡⵉⵏ ⵏ ⵓⵏⴳⵉⵙⵏ, ⴷ ⴰⵔ ⵢⴰⵇⵇⵔⴰ ⵓⴱⵔⴰⴳⵔⴰⵡ ⴰⵙⵏⵎⴰⵍⴰ ⴰⴳⵔⴰⵖⵍⴰⵏ ⵙ ⵜⴰⴷⴷⵓⵢⵜ ⴼ ⵜⴰⵏⵏⴰⵍⵜ ⵏ ⵓⵙⵡⵉⴳⵎ ⵉⵍⵍⴰⵙⵏ,  ⴷ ⵓⵙⵏⴼⴰⵍⴰⵍ ⵏ ⵡⴰⵡⴰⴽⵏ ⵍⵍⵉ ⵜⵜⴰⵡⵙⵏⵉⵏ ⵉ ⵓⴱⵔⵙⵙⵉⵡⴷ  ⴷ ⵜⴰⴱⴱⴰⵢⵜ ⵏⵏⵙ ⴳ ⵢⵉⴳⵔ ⴰⵙⵔⴰⵜⴰⵏ ⴷ ⵓⴷⴰⵎⵙⴰⵏ ⴷ ⵓⴷⵉⴱⵍⵓⵎⴰⵙⵉⵢ.
ⴰⵔ ⵏⵜⵜⵉⵏⵉ ⵎⴰⵙ ⴷ ⵜⴰⵙⵙⴰⵙⵜ ⵏ ⵉⵎⵣⵡⴰⴳⵏ ⵜⴳⴰ ⵜⴰⵢⴰⴼⵓⵜ ⵏ ⵡⴰⵡⴰⵏⴽⵏ ⵉⵄⵓⵔⵓⴱⵉⵢⵏ ⵉⴷⵉⴽⵜⴰⵜⵓⵔⵉⵢⵏ, ⴰⵔ ⴼⵔⵔⵓⵏ ⵉⵎⵔⵡⴰⵙⵏ ⵏⵏⵙ ⵉⵡⴰⵏⴽⵏ ⵉⴷⵉⵎⵓⵇⵔⴰⵜⵉⵢⵏ ⵍⵍⵉⵖ ⵓⴳⵯⵉⵏ ⵡⴰⵡⴰⵍⴽⵏ ⵉⴱⵉⵜⵔⵓⴹⵓⵍⴰⵔ ⴰⴷ  ⵜⵏ ⵙⵏⵓⴱⴱⴳⵏ.
ⴰⵔ ⵏⵙⵎⵉⴳⵉⵍ ⵜⵉⵎⵜⵜⵉⵜⵉⵏ ⵉⵎⵓⵏⵏ  ⴷ ⵓⵏⴼⵍⵓⵙ ⵏⵏⵙ ⴰⵎⵜⵜⵓⵢ  ⴷ ⵜⵎⵔⵙⴰⵍ ⵜⵉⵣⵔⴼⴰⵏⵉⵏ  ⵜⵉⴳⵔⴰⵖⵍⴰⵏⵉⵏ  ⵙ  ⵉⵎⵏⵖⴰⵏ ⵉⵏⴰⴱⴽⴰⴹⵏ/ ⵉⵎⵏⵖⵉ ⵏ ⵓⵙⵣⴷⴳⵉ ⴰⵥⵓⵔⴰⵏ ⵍⵍⵉ ⵓⵙⵉⵏ ⴽⵔⴰ ⵏ ⵡⴰⵡⴰⵏⴽⵏ ⵙ ⵓⵎⴰⴷⴰⵏ ⴰⴽⵓⵔⴷⵉⵢ.
ⴰⵙⵓⵜⵜⴳ ⵏⵏⵖ  ⴰⵢⵍⵍⵉ ⴷ ⵢⵓⵛⴽⴰⵏ ⵖ ⵓⵎⵙⴰⵙⴰ ⵏ ⵡⴰⴼⴰ ⵏ ⵓⵏⵣⵡⵉ ⴳ ⴱⴰⵔⵉⵣ, ⴷ ⴰⵔ ⵏⴰⵇⵇⵔⴰ ⵉ ⵡⴰⵡⴰⵏⴽⵏ ⴷ ⵜⵏⴱⴰⴹⵉⵏ  ⴼ ⴰⴷ ⴰⵙⵉⵏⵜ ⵜⴰⵎⴰⵙⵙⴰⵢⵜ ⴳ ⵎⴰⴷ ⵉⵍⴰ ⵓⵎⵣⵔⵓⵢ ⴷⴰⵜ ⵏ ⵜⴰⵙⵓⵜⵉⵏ ⴷ ⵉⴷⴷⴰⵏ ⴳ ⵓⵣⵓⴳⴳⵣ ⵏ ⵓⵎⵙⴰⵙⴰ ⴷ ⵓⵙⴽⵔ ⵙ ⵉⵎⵉⵙ ⵏ ⵓⵎⵙⴰⵙⴰ ⴷ ⵓⴼⵔⴰⴳ ⵏ ⵡⴰⴽⴰⵍ ⵙⴳ ⵓⵔⴷⴰⵍ ⵏ ⵓⴼⴳⴰⵏ ⴷ ⵜⵏⵢⴰⴼⵉⵏ ⵏ ⵉⵍⵓⴱⵉⵢⵏ  ⴷ  ⵜⵎⴰⵙⵓⵔⵉⵏ ⵜⵉⴷⴰⵎⵙⴰⵏⵉⵏ ⵜⵉⵎⴰⴹⵍⴰⵏⵉⵏ.

ⵙⴳ ⵓⴱⵔⴰⴳⵔⴰⵡ ⴰⵏⴰⵎⵓⵔ ⵡⵉⵙⵙ ⴽⵕⴰⴹ ⵏ ⵜⵎⴰⴳⵔⴰⵡⵜ ⵉⵣⵔⴼⴰⵏ
ⴰⵏⴼⴰ ⵓⵙⵙⴰⵏ ⵏ : 21 ⴷ 22/ 12/2965
02 ⴷ 03 ⵉⵏⵏⴰⵢⵔ 2015















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